मेरठ संवाददाता एन 20 न्यूज
मेरठ।मेरठ की सरधना तहसील का गांव भामौरी आज भी देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूतों की शौर्यगाथा को संजोए हुए है। गांव की मिट्टी में आज भी उन बलिदानियों की यादें बसी हैं, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। 18 अगस्त 1942 की घटना भामौरी के इतिहास का वह अध्याय है, जिसे ग्रामीण आज भी गर्व और भावुकता के साथ याद करते हैं।बताया जाता है कि आजादी के आंदोलन के दौरान पंडित राम स्वरूप के नेतृत्व में क्रांतिकारी मोटो की चौपाल पर एकत्रित थे। अंग्रेज अफसरों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने गांव में फौज भेज दी। अंग्रेजी सैनिकों ने मोटो की चौपाल पर पहुंचकर फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में प्रहलाद सिंह, लटूर सिंह, फतेह सिंह और बादल सिंह ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।ग्रामीणों के अनुसार, अंग्रेजी फौज ने पंडित राम स्वरूप को गिरफ्तार कर लिया और उनका सिर कलम कर दिया। क्रांतिकारियों के इस बलिदान से अंग्रेजी हुकूमत इतनी बौखला गई थी कि पूरे भामौरी गांव को तोप से उड़ाने का फरमान तक जारी कर दिया गया था। यही वजह है कि भामौरी को आज भी क्षेत्र में शहीदों के गांव के रूप में याद किया जाता है।शहीदों की याद में हर वर्ष मनाया जाता है 18 अगस्त को शहीद दिवसअमर शहीदों के बलिदान की याद में भामौरी में प्रत्येक वर्ष 18 अगस्त को शहीद दिवस मनाया जाता है। गांव में बने शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसके बाद ग्रामीण ऐतिहासिक मोटो की चौपाल पर पहुंचकर अमर शहीदों को पुष्प अर्पित कर नमन करते हैं।इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने गांव में प्रभात फेरी निकाली। बच्चों ने देशभक्ति गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर वातावरण को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। बच्चों के हाथों में तिरंगा और देशभक्ति के नारों से गांव का माहौल पूरी तरह राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत नजर आया। सरधना विधायक अतुल प्रधान भी अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे और शहीदों को नमन किया और श्रद्धांजलि दी साथ ही उन्होंने ग्रामीणों का आश्वासन दिया कि गांव की तरक्की के लिए अथक प्रयास किए जाएंगे।इसी क्रम में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे विधायक संगीत सोम ने शहीद स्मारक पर अमर शहीदों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों का बलिदान सदैव याद रखा जाना चाहिए।भामौरी के इस गौरवशाली इतिहास को अब गांव में बनाए गए संग्रहालय (Museum) में भी संजोया गया है। संग्रहालय में शहीदों और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी स्मृतियों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने गांव के वीर सपूतों के संघर्ष और बलिदान को जान सकें।नई पीढ़ी को प्रेरणा देता है भामौरी का इतिहासभामौरी का शहीद दिवस केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देने का अवसर भी है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी की लड़ाई में गांव के वीरों ने जो कुर्बानी दी, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।कार्यक्रम में सरधना एसडीएम उदित नारायण सेंगर आशुतोष कुमार, थाना प्रभारी दिनेश प्रताप, तहसीलदार ज्योति सिंह नायक तहसीलदार भूपेंद्र सिंह, नायब तहसीलदार अनुजा आत्रे, कपसाढ़ से एडवोकेट यशपाल सिंह, आनंद सिंह, पूर्व प्रधान पति अजय सिंह उर्फ़ सोनू, राहुल सोम, बीर सिंह, शिव ओम, विक्रम सिंह, प्रधान दिनेश कुमार, कैलाश सिंह, तेजबीर, राज कुमार, बिट्टू सिंह, गांव पाली से निरंजन शास्त्री, ग्राम पाली प्रधान जय कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और गणमान्य लोग मौजूद रहे।भामौरी की मोटो की चौपाल आज भी उन वीरों की कहानी कहती है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने के बजाय देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देना स्वीकार किया।



