पीडीए नारे के बावजूद जमीनी पकड़ कमजोर, नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर उठे प्रश्न
अनीस अहमद संवाददाता एन 20 न्यूज
मेरठ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जहां प्रदेशभर में ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे को लेकर लगातार सक्रिय अभियान चला रहे हैं, वहीं मेरठ में पार्टी संगठन की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर संगठन की निष्क्रियता और कमजोर पकड़ को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।जिला अध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुमी पर आरोप लग रहे हैं कि वे संगठन को मजबूत करने और पीडीए परिवार को विस्तार देने में अपेक्षित भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिले में न तो बड़े स्तर पर कोई जनआंदोलन दिखाई दे रहा है और न ही जनसमस्याओं को लेकर प्रभावी विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इससे जमीनी स्तर पर सपा की सक्रियता कमजोर पड़ती नजर आ रही है।इतना ही नहीं, संगठन के भीतर एक और मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि जिला अध्यक्ष का दायित्व उनके बेटे गिरेंद्र सिंह द्वारा संभाला जा रहा है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष और बढ़ गया है। कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे संगठन में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक कार्यशैली प्रभावित हो रही है।वहीं, पूर्व जिला अध्यक्ष विपिन चौधरी के कार्यकाल की तुलना वर्तमान नेतृत्व से की जा रही है। बताया जाता है कि उनके समय में योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ कई बड़े धरने-प्रदर्शन आयोजित किए गए थे और पार्टी कार्यकर्ता लगातार सक्रिय रहते थे। उस दौरान पीडीए के नारे को भी जमीनी स्तर पर मजबूती से आगे बढ़ाया गया था और विभिन्न वर्गों को जोड़ने के प्रयास किए गए थे।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती उसके सक्रिय संगठन और प्रभावी नेतृत्व पर निर्भर करती है। ऐसे में मेरठ में सपा को दोबारा मजबूत करने के लिए ठोस रणनीति और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की जरूरत है।अगर समय रहते इन संगठनात्मक कमियों को दूर नहीं किया गया, तो इसका असर आगामी चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। फिलहाल, कार्यकर्ताओं की निगाहें पार्टी नेतृत्व पर टिकी हैं कि वे इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

