अनीस संवाददाता एन 20 न्यूज
सरधना। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की सरधना क्षेत्र के गांव इकड़ी में आयोजित एकता रैली शनिवार को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। रैली में केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा सांसद और रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़, बड़े नेताओं की मौजूदगी और विकास-किसान एजेंडे के बीच एक बात सबसे ज्यादा चर्चा में रही—मुस्लिम समाज की बेहद कम भागीदारी।रैली में जयंत चौधरी ने अपने संबोधन में किसानों, युवाओं, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं को प्रमुखता दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल हमेशा किसानों की आवाज रही है और आगे भी किसान हित सर्वोच्च प्राथमिकता रहेंगे। युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है।महिलाओं की भागीदारी पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया और कहा कि छोटे-छोटे उद्योगों के माध्यम से महिलाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। सरकार उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए हर संभव सहयोग दे रही है।

हालांकि, रैली के राजनीतिक मायने सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहे। सबसे बड़ा सवाल मुस्लिम समाज की कम उपस्थिति को लेकर उठा। बड़ी संख्या में जाट और ग्रामीण समर्थक पहुंचे, लेकिन मुस्लिम समुदाय की मौजूदगी बेहद सीमित नजर आई। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभावित टिकट दावेदार इस वर्ग को अपेक्षित संख्या में जुटाने में सफल नहीं रहे।यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सिवालखास सीट पर जाट-मुस्लिम गठजोड़ के दम पर विधायक गुलाम मोहम्मद ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में रालोद की इस बड़ी रैली में मुस्लिम समाज की कमजोर मौजूदगी आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जाट-मुस्लिम सामाजिक संतुलन दोबारा मजबूत नहीं हुआ, तो इसका असर भविष्य की चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है। यही कारण है कि रैली में भीड़ होने के बावजूद राजनीतिक हलकों में चर्चा विकास एजेंडे से ज्यादा सामाजिक समीकरणों पर केंद्रित रही।रैली में सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, सांसद चंदन चौहान, पूर्व सांसद के.सी. त्यागी, राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी, कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, विधायक गुलाम मोहम्मद, विधायक प्रसन्न चौधरी, विधायक अजय कुमार, विधायक अशरफ अली, रणबीर दहिया, सिवाल खास विधानसभा अध्यक्ष राशिद नंबरदार, विवेक, संजय चौधरी, समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे।भीड़, शक्ति प्रदर्शन और विकास के संदेश के बीच यह रैली एक और संकेत दे गई—आगामी चुनाव सिर्फ नारों से नहीं, सामाजिक समीकरणों की मजबूती से तय होंगे।

