अनीस अहमद संवाददाता एन 20 न्यूज
मेरठ।बस स्टैंड पुलिस चौकी क्षेत्र के लोग बीते कई महीनों से भीषण जलभराव की समस्या का दंश झेलने को मजबूर हैं। नालियों और नालों की नियमित सफाई न होने के कारण क्षेत्र में रोज़ाना पानी भर जाता है, जिससे आम नागरिकों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोगों को मजबूरी में गंदे और बदबूदार पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका के अधिकारियों, सफाई निरीक्षकों और नगर चेयरमैन को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया है। बावजूद इसके, आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह से आंख मूंदे बैठा है और जनता की परेशानियों की अनदेखी कर रहा है।क्षेत्रवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि सफाई कर्मी अपनी ड्यूटी के प्रति पूरी तरह लापरवाह हैं। यदि कभी सफाई के लिए आते भी हैं तो नालियों की आधी-अधूरी सफाई कर चले जाते हैं, जिससे कुछ ही घंटों में फिर से जलभराव हो जाता है। कई स्थानों पर नालियां पूरी तरह चोक पड़ी हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों पर फैल रहा है।बुधवार को स्थिति और भी गंभीर हो गई, जब बस स्टैंड पुलिस चौकी के मुख्य द्वार पर भारी जलभराव हो गया। चौकी परिसर में पानी भर जाने से पुलिसकर्मियों को भी आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं, अपनी शिकायतें लेकर पुलिस चौकी पहुंचने वाले फरियादियों को भी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।जलभराव के चलते क्षेत्र में स्थित दुकानों और छोटे व्यापारियों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक गंदगी और पानी के कारण दुकानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी ठप हो गई है। कई दुकानदारों ने बताया कि लगातार नुकसान के चलते उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।क्षेत्रवासियों का कहना है कि जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।लोगों में नगर पालिका प्रशासन और नगर अध्यक्ष के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। क्षेत्रवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नालियों की सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई, तो वे मजबूरन धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी।

