मेरठ संवाददाता एन 20 न्यूज़
मेरठ। बारिश केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि प्रकृति को महसूस करने का एक अवसर भी है, जो बच्चों को किताबों से परे जाकर सीखने का मौका देता है। शुक्रवार को हुई झमाझम बारिश ने पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रों को अपनी रचनात्मकता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का अवसर दिया।शिक्षक डॉ. आरसी पांडेय ने कक्षा सातवीं के छात्रों को पानी आया, पानी आया विषय पर कविता लिखने के लिए प्रेरित किया। बच्चों ने बरामदे से बारिश को देखते हुए अपनी भावनाओं को कविताओं में व्यक्त किया। प्राची ने लिखा, पानी आया, पानी आया, हरियाली से जग को हर्षाया। लवी नागर ने उसमें जोड़ा मोरों ने भी नाच दिखाया। यशी ने इंद्रधनुष को देखा और लिखा इंद्रधनुष ने जाल बिछाया।बच्चों की इन कविताओं में प्रकृति के प्रति उनकी गहरी समझ झलकती है। सूर्यवंशी ने बारिश की बूंदों के संगीत को महसूस करते हुए लिखा पंख फैलाकर कैसे गाया। वहीं, आवेश खान और समर ने बारिश के बाद धरती में आए बदलावों को महसूस किया। आवेश ने लिखा धरती ने नया जन्म-सा पाया। जबकि समर ने कहा धरती ने नव अंकुर उगाया। खुशी सैनी की कविता में भी इसी भावना का विस्तार दिखा, पौधों ने नया जीवन पाया।अर्नव ने बारिश से जुड़े घरेलू अनुभव को साझा करते हुए लिखा मम्मी ने पकवान बनाया। और अनूशा ने अपनी कविता में पारिवारिक खुशी को दर्शाया- नानी का भी मन हर्षाया।डॉ. पांडेय ने केवल रचनात्मकता को ही बढ़ावा नहीं दिया, बल्कि उन्होंने विज्ञान को भी मजेदार तरीके से समझाया। उन्होंने एनसीईआरटी की नई किताब मल्हार से पानी रे पानी निबंध पढ़ाते हुए, जलचक्र (वाष्पीकरण, संघनन और वर्षा) के वैज्ञानिक पहलुओं को भी बच्चों के साथ बातचीत के माध्यम से स्पष्ट किया।विद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेश कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी शिक्षण विधियों से बच्चों में पर्यावरणीय चेतना और अनुभव आधारित शिक्षा का विकास होता है। इस रचनात्मक शिक्षण कार्यक्रम में विज्ञान शिक्षिका पंकज दीक्षित, मराठी शिक्षक दीपक बाबूराव और शारीरिक शिक्षक मुकुल सिंह ने भी बच्चों का उत्साह बढ़ाया।

