अधिकारियों व पत्रकारों पर संघ का नाम लेकर रोब गालिब करता है कथित स्वयंसेवक
मेरठ संवाददाता एन 20 न्यूज़
मेरठ/मवाना।देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट द्वारा खनन को रोकने के लिए भले ही अनेकों बार आदेश पारित किए जा चुके हों लेकिन अवैध खनन से जुड़े माफियाओं पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। ताजा मामला मेरठ जनपद की मवाना तहसील का है जहां परीक्षितगढ़ की तरफ एक गांव के रहने वाले कथित स्वयंसेवक द्वारा देश के सबसे बड़े संगठन का नाम लेकर अधिकारियों,पत्रकारों व पुलिस पर रोब गालिब किया जाता है इस कथित स्वयंसेवक द्वारा मवाना तहसील क्षेत्र में बड़ा खनन का सिंडिकेट चलाया जा रहा है और इस सिंडिकेट में एक दर्जन से अधिक खनन माफिया शामिल हैं। आपको बता दें कि मवाना तहसील क्षेत्र में इन दिनों व्यापक पैमाने पर अवैध खनन का काला कारोबार किया जा रहा है और ये खनन माफिया बहुत बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर किसानों के खेतों से मिट्टी उठाकर अवैध तरीके से बनाई जा रही अनाधिकृत कालोनियों में भराव किया जा रहा है। इस कथित स्वयंसेवक द्वारा आरएसएस के एक बड़े पदाधिकारी का नाम लेकर खुद को संघ का जिला सह संयोजक बताया जाता है और अधिकारियों,सिस्टम,पुलिस व पत्रकारों पर रोब गालिब किया जाता है जबकि इस संदर्भ में जब संघ के बड़े पदाधिकारी से जानकारी हासिल की गई तो उन्होंने बताया कि इस व्यक्ति से उनका व संघ परिवार का कोई लेना देना नहीं है ना तो वो इस कथित स्वयंसेवक को जानते और ना ही इसके पास संघ परिवार में कोई पद है।*अवैध खनन के सिंडिकेट से रात के अंधेरे में चांदी कमा रहे खनन माफिया*इन अवैध खनन माफियाओं द्वारा मवाना कस्बे के साथ साथ आसपास के गांवों से रात के समय हाइवे डंफर,ट्रैक्टर ट्राली,जेसीबी मशीनों से बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है और मोटी चांदी काटी जा रही है। इन खनन माफियाओं के सिंडिकेट को कथित स्वयंसेवक ऑपरेट करता है और दर्जनों खनन माफियाओं से क्षेत्र में बहुत ही बड़े पैमाने पर अवैध खनन का कारोबार करा रहा है,एक सूत्र ने तो जानकारी देते हुए यहां तक बताया कि उक्त कथित स्वयंसेवक द्वारा जिला रामपुर के रहने वाले एक अवैध खनन माफिया के साथ पार्टनरशिप करके उसे कुछ ही सालों में करोड़पति बना दिया है। उस खनन माफिया के पास करीब एक दर्जन डंपर,आधा दर्जन जेसीबी मशीनें,एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर ट्रालियों का जखीरा है और उस खनन माफिया की आड़ में ही फलावदा के गांव मंदवाड़ी में आधा दर्जन से अधिक खनन माफिया एक्टिव हैं। वहीं फलावदा के ही गांव गुडंब में भी आधा दर्जन से अधिक खनन माफियाओं का सिंडिकेट बड़े पैमाने पर काम कर रहा है ये खनन माफिया तमाम नियम कायदों को ताक पर रखते हुए क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर बालू मिट्टी का खनन बिना रॉयल्टी जमा कराए और खनन विभाग द्वारा जारी किए गए नियमों की भी धज्जियां उड़ाकर किया जा रहा है। अब सवाल ये खड़ा होता है कि सुप्रीम कोर्ट,योगी सरकार,खनन विभाग,राजस्व विभाग की नाक के नीचे किस सैटिंग के जरिए इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन का काला कारोबार किया जा रहा है और इतने बड़े स्तर पर काम करने वाले लोगों को कथित स्वयंसेवक का संरक्षण कैसे प्राप्त है क्या माफियाओं,गुंडों पर कार्यवाही करने वाली सरकार के अधिकारी इन खनन माफियाओं के सिंडिकेट के आगे नत्मस्तक कैसे है।

