मेरठ संवाददाता AN20NEWS
मेरठ । तूफान और अंधड़ के बाद से वातावरण में धूल कण बढ़ गए हैं। ये धूल कण घातक होने लगे हैं। टीबी, अस्थमा से पीड़ित मरीजों के साथ स्वस्थ लोग खांसते-खांसते परेशान हैं। इन बिगड़े हालात में सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीज फेफड़े फटने पर भर्ती हो रहे हैं।
डॉ. ऋषभ अग्रवाल एमडी (चेस्ट) ने कहा कि धूल भरी आंधी-तेज हवाओं का सिलसिला जारी है। इस बीच तूफान भी आ चुका है और बीच-बीच में बारिश भी हुई है। इससे वातावरण में धूल कणों की मात्रा बढ़ गई है। इतने समय तक वातावरण में लगातार धूल कण रहने से एलर्जी की समस्या बढ़ रही है। इससे लोग खांसते-खांसते परेशान हैं। सबसे ज्यादा समस्या टीबी, अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रेक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के मरीजों को हो रही है।
डॉ. ऋषभ अग्रवाल एमडी (चेस्ट) एलर्जी और लगातार खांसने से टीबी मरीजों के फेफड़े फट रहे हैं। हा कि पिछले 15 दिनों में गले की एलर्जी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। धूल कण से एलर्जी और वायरल संक्रमण से गला जकड़ने पर मरीज क्लीनिक पर पहुंच रहे हैं।
ये करें
– मुंह पर रुमाल बांध कर बाहर निकले, जिन्हें धूल से एलर्जी से वे डॉक्टर से परामर्श लेकर मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं।
– धूप में रहने के तुरंत बाद ज्यादा ठंडे तरल पदार्थो का सेवन न करें, इससे वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
– गर्मी में डीहाइड्रेशन से भी गले में एलर्जी की समस्या बढ़ती है, पानी का सेवन अधिक करें।
बोले डॉ. ऋषभ अग्रवाल
टीबी, अस्थमा और सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित मरीज दवा की डोज डॉक्टर के परामर्श के बिना कम न करें। धूल कण की एलर्जी से खांसते- खांसते टीबी मरीजों के फेफड़े फट रहे हैं। फेफड़ों में हवा भर रही है, ऐसे में चेस्ट ट्यूब डालनी पड़ रही है। अस्थमा और सांस संबंधी बीमारी में तबीयत में सुधार होने पर मरीज दवा की डोज कम कर देते हैं। ऐसे में धूल कण और वायरल संक्रमण घातक हो रहा है। धूल कणों के साथ गर्मी से गले की एलर्जी बढ़ गई है। इससे तेज बुखार आने के साथ गला खराब हो रहा है। इस मौसम में विटामिन सी का इस्तेमाल ज्यादा करना चाहिए। धूप से आने के बाद ठंडा पानी पीने से गला जकड़ रहा है, एलर्जी के साथ वायरल संक्रमण से गला जकड़ रहा है। इसे सही होने में समय लग रहा है।
धूल-आंधी से छाती रोगियों को परेशानी
धूल-आंधी छाती रोगियों के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकती है। धूल के कण फेफड़ों में जलन पैदा कर सकते हैं, जिससे सांस लेने में कठिनाई, खांसी और घरघराहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी जैसे फेफड़ों की बीमारियों वाले लोगों को धूल-आंधी से और भी अधिक परेशानी हो सकती है.
धूल-आंधी के कारण छाती रोगियों में होने वाली समस्याएं:
सांस लेने में कठिनाई: धूल के कण वायुमार्ग में जलन पैदा करते हैं, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है.
खांसी और बलगम: धूल के कण सांस की नली में जलन पैदा करते हैं, जिससे खांसी और बलगम का उत्पादन बढ़ जाता है.
घरघराहट: धूल के कण वायुमार्ग को संकुचित कर देते हैं, जिससे घरघराहट होती है.
सीने में जकड़न: धूल के कण फेफड़ों में सूजन पैदा करते हैं, जिससे सीने में जकड़न होती है.
अस्थमा के दौरे: धूल-आंधी अस्थमा के दौरे को ट्रिगर कर सकती है, जिससे सांस लेने में और भी अधिक कठिनाई होती है.
धूल-आंधी से बचने के लिए:धूल-आंधी के दौरान बाहर जाने से बचें, यदि आपको बाहर जाना है, तो एन95 मास्क या अन्य प्रकार के मास्क पहनें। धूल-आंधी के दौरान खिड़कियाँ और दरवाजे बंद रखें। धूल-आंधी के दौरान घर के अंदर एयर कंडीशनर चलाएं। धूल-आंधी के बाद घर को अच्छी तरह से साफ करें। गर्म पानी, भाप और शहद वाली चाय जैसे घरेलू उपचारों का उपयोग करें, यदि आपको धूल-आंधी के कारण छाती में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लें.

