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जानी थाना की सुभारती चौकी क्षेत्र में ओयो की भरमार, पुलिस के संरक्षण में फल फूल रहा धंधा
विशेष संवाददाता एन 20 न्यूज
मेरठ। थाना जानी के सुभारती चौकी क्षेत्र में ओयो होटलों में जिस्मफरोशी का धंधा बेखौफ किया जा रहा है। ओयो होटलों के नाम पर खुले जिस्म फरोशी के ये अड्डे बन चुके है। जिसे लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार सुभारती चौकी प्रभारी और जानी थाना प्रभारी से कर चुके है बावजूद इसके लगातार आरोपी बेखोफ होकर जिस्मफरोशी का धंध कर रहे है।बता दे कि जानी थाना क्षेत्र की सुभारती चौकी क्षेत्र में करीब 15 ओयो होटल है। जिनमें होटल संचालक बेखोफ होकर जिस्मफरोशी का धंधा चला रहे है। जिसकी स्थानीय लोगों ने कई बार चौकी और थाने पर शिकायत की है। लेकिन चौकी पुलिस और थाने की पुलिस की सांठगाठ में धंधा लगातार पनप रहा है।
ये है नियम, पालन एक का भी नहीं
फायर एनओसी : नहीं
मानचित्र स्वीकृत : नहीं
सराय एक्ट में पंजीकरण : नहीं
एफएसएसए आई : नहीं
जीएसटी : नहीं
पुलिस लाइसेंस : नहीं
पुलिस आंख बंद कर बैठी है। मामले की शिकायत जब एन 20 न्यूज टीम को मिली तो बीते 8 दिन में जानी थाना के सुभारती चौकी क्षेत्र में चल रहे ओयो होटलों की पड़ताल की तो चौंकाने खुलासे हुए। साथ ही पुलिस के संरक्षण की भी पोल खुल गई। टीम की जानकारी में आया कि पुलिस केवल ओयो होटलों के नाम पर जिस्मफरोशी के इन अड्डों की अनुमति ही नहीं दे रही बल्कि उच्चधिकारियों के निरीक्षण के दौरान इनकी मदद करती है।नियमों का खुला उल्लंघन, फिर भी ओयो संचालित होटल सरीखे किसी भी कारोबार के लिए प्रशासन से ली जाने वाली अनुमति में फायर एनओसी सबसे प्रमुख है, लेकिन लगता है कि प्रशासन और पुलिस पूरे महानगर में कुकरमुक्तों की तरह उग आए ओयो होटलों के फायर एनओसी लेने की बाध्यता को जरूरी नहीं समझती है। क्योंकि एन 20 न्यूज की पड़ताल में पता चला है कि ओयो होटलों पर फायर एनओसी नहीं है।होटल खोलने के लिए सबसे जरूरी सरकारी प्रक्रिया जो भी होटल खोला जा रहा है सराय एक्ट में उसका पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है लेकिन प्रशासन व पुलिस के आला अफसर ओयो होटलों के मामलों में सराय एक्ट की अनिवार्यता को लगता है भुलाए बैठे हैं। तमाम संचालकों ने ओयो होटल सराय एक्ट में पंजीकरण कराना जरूरी नहीं समझा है।महज दो दो कमरों में खोल दिए गए ओयो होटलोंसुभारती चौकी क्षेत्र में चल रहे ओयो होटल बिना अनुमति के चल रहे है। अवासीय मकानों के दो दो कमरे में ओयो होटल चल रहे है। जिनका नक्शा भी मेरठ विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं कराया गया है। दरअसल ज्यादातर ओयो होटल किरायो की जगह पर संचालित किए जा रहे हैं। होटल के लिए प्राधिकरण से जो मानचित्र स्वीकृत कराना अनिवार्य किया गया है उस अनिवार्यता को भी ओयो संचालकों में रद्दी की टोकरी में डाल दिया है क्योंकि दस हजार रुपये महीना सुभारती चौकी व जानी थाने पर पहुंच रहा अब देखना यह होगा कि उनके ऊपर क्या कार्रवाई होती है। एसपी देहात राकेश कुमार मिश्रा का कहना है होटल की जांच की जाएगी जांच में कोई गलत पाया जाता है तो होटल संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

