संचित अरोड़ा मेरठ संवाददाता एन 20 न्यूज़
मेरठ/मवाना..प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों के प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के क्षमता संवर्धन के लिए एकीकृत शिक्षण प्रशिक्षण मॉड्यूल संपूर्ण पर आधारित पांच दिवसीय द्वितीय फेरे का शुभारंभ महात्मा गांधी प्रेक्षागृह, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, मेरठ में प्राचार्य मनोज कुमार आर्य, वरिष्ठ प्रवक्ता श्रीमती गीता वर्मा, प्रशिक्षण प्रभारी डॉ अमित सिंह, प्रवक्ता डॉ पूजा शर्मा, प्रदीप कुमार, श्रीमती प्रतिमा यादव, गौरव त्यागी, एवं नरेश कुमार द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। वरिष्ठ प्रवक्ता श्रीमती गीता वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्थान समय-समय पर प्रशिक्षण, सेमिनार एवं कार्यशालाएं आयोजित कर शिक्षकों की शैक्षिक समस्याओं का समाधान और उनके व्यावसायिक विकास हेतु प्रयासरत है। उन्होंने दीक्षा ऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाने पर बल दिया। प्राचार्य मनोज कुमार आर्य ने कहा कि यह प्रशिक्षण शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। जिसमें जनपद मेरठ के लगभग 900 शिक्षक शिक्षिकाएं सम्मिलित होंगे। यह कार्यक्रम शिक्षकों को शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक उत्तरदायित्वों,विद्यालय प्रबंधन, एवं गतिविधि आधारित शिक्षण में दक्ष बनाने में सहायक सिद्ध होगा। डॉ पूजा शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) एवं विद्यालय शिक्षा हेतु राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 (NCFSE) की प्राथमिक शिक्षा में प्रासंगिकता पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह नीति वर्तमान शैक्षणिक, सामाजिक व राष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक है। डॉ अमित सिंह (प्रशिक्षण प्रभारी) ने ‘संपूर्ण’ मॉड्यूल की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए शिक्षकों को नियमित उपस्थिति एवं मनोयोगपूर्वक सहभागिता के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एनसीईआरटी आधारित नवीन पाठ्य पुस्तकों के उन्मुखीकरण पर व्याख्यान देते हुए बताया कि ये पुस्तकें शीघ्र ही विद्यालयों में उपलब्ध होंगी, जो एक राष्ट्र एक पाठ्यक्रम की भावना को सशक्त बनाएंगी।श्रीमती प्रतिमा यादव ने निपुण भारत मिशन एवं FLN पर चर्चा करते हुए कक्षा 3 को आधारभूत शिक्षा का निर्णायक बिंदु बताया और लक्ष्य प्राप्ति के उपायों को साझा किया। प्रदीप कुमार ने कला एवं संगीत द्वारा प्रभावी शिक्षण की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कला बच्चों के भावों को सहज अभिव्यक्ति देने के साथ-साथ शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने में सहायक है। गौरव त्यागी (प्रवक्ता) ने विज्ञान शिक्षण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान की अवधारणाओं को प्रयोग आधारित एवं जिज्ञासा केंद्रित पद्धति से पढ़ाया जाए तो छात्रों में तार्किक चिंतन, विश्लेषण क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का बेहतर विकास संभव है। उन्होंने स्थानीय संदर्भों का उपयोग करते हुए सरल भाषा में विज्ञान पढ़ाने के महत्व पर बल दिया। नरेश कुमार ने कहा कि संपूर्ण प्रशिक्षण मॉड्यूल का उद्देश्य विभिन्न विषयों एवं प्रशिक्षणों को एकीकृत करते हुए शिक्षकों को सर्वांगीण रूप से दक्ष बनाना है। इसमें सुरक्षा एवं संरक्षा खेल आधारित शिक्षण संवादात्मक शिक्षण एनईपी एनसीएफएसई कला-संगीत नवीन पाठ्यपुस्तकें भाषा गणित विज्ञान सामाजिक अध्ययन नैतिक शिक्षा तथा पर्यावरण जागरूकता जैसे विषयों को समाहित किया गया है। यह प्रशिक्षण निश्चित रूप से अपने नाम संपूर्ण’ को सार्थक करता है।कार्यक्रम की सफलता में प्रशिक्षकों एवं संस्थान के समस्त स्टाफ का योगदान सराहनीय रहा।

