मेरठ संवाददाता एन 20 न्यूज़
मेरठ।शिवरात्रि पर्व यानि 23 जुलाई जैसे-जैसे करीब आ रहा है, हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे शिव भक्तों का उत्साह चरम पर है। इसी कड़ी में, सरूरपुर नहर पर कांवड़ मेले का भव्य आयोजन देखने को मिल रहा है, जहां हजारों की संख्या में कांवड़िए एकत्र हुए हैं। यह पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है, और दर्जनों सेवा शिविरों में कांवड़ियों की सेवा के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा है।दूर क्षेत्रों से आ रहे कांवड़िए गंग नहर मार्ग से होते हुए अपने-अपने गंतव्यों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से, चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर डाक कांवड़ का सिलसिला भी शुरू हो गया है, जिससे मार्ग पर शिवभक्तों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं, आसपास के क्षेत्रों से आने वाले शिव भक्त, जो पुरा महादेव में जलाभिषेक करने के लिए पहुंच रहे हैं, उन्होंने सरूरपुर नहर के निकट लगे सेवा शिविरों में विश्राम और कांवड़ झूलाने का क्रम शुरू कर दिया है। इन कांवड़ियों की संख्या अब हजारों में पहुंच चुकी है, जिससे यह क्षेत्र एक लघु धार्मिक नगरी का रूप ले चुका है।

कांवड़ियों की सेवा के लिए सरधना, सरूरपुर और आसपास के विभिन्न संगठनों व व्यक्तियों द्वारा दर्जनों सेवा शिविरों का आयोजन किया गया है। ये शिविर कांवड़ियों के लिए खाने-पीने, ठहरने, प्राथमिक चिकित्सा और उनकी दिनचर्या से संबंधित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं प्रदान कर रहे हैं। प्रमुख सेवा शिविरों में शिव कांवड़ सेवा समिति सरधना, शिव कांवड़ विशाल भंडारा, रोटरी क्लब सरधना, सरधना कांवड़ सेवा संघ (निशुल्क चिकित्सा शिविर), स्वास्थ्य विभाग का कांवड़ चिकित्सा शिविर, मानव उत्थान सेवा समिति, सरधना का शिविर आदि शामिल हैं। इन शिविरों में राकेश गोयल, गौरव गुप्ता, संजीव गुप्ता,सुरेश जिंदल, महेश जिंदल, विनीत माहेश्वरी, संजीव गुप्ता, मनोज बंसल, अश्विनी गुप्ता, रजत गोयल, उमेश विश्नोई, राजन चौधरी, राकेश कंसल, पुनीत जिंदल, संदीप महेश्वरी,ललित गुप्ता, काव्य बंसल, मनोज बंसल, विजय भारती, हिमांशु गोयल,सहित क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहकर सेवा कार्यों में हाथ बंटा रहे हैं।सेवा शिविरों में भक्ति भाव चरम पर है। कई स्थानों पर शिव-पार्वती का वेश धारण किए कलाकार भक्तिमय भजनों पर नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे कांवड़ियों और वहां मौजूद श्रद्धालुओं का खूब मनोरंजन हो रहा है। यह दृश्य भक्ति के माहौल को और भी कई गुना बढ़ा रहा है। आसपास के ग्रामीण और शहरी लोग भी कांवड़ियों की सेवा के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। वे शीतल पेय, फल और अन्य आवश्यक सामग्री लेकर शिविरों में पहुंच रहे हैं ताकि थकान और गर्मी से जूझ रहे शिव भक्तों को कुछ राहत मिल सके। यह कांवड़ मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामुदायिक सौहार्द और निःस्वार्थ सेवा भावना का भी एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है।

