मेरठ संवाददाता एन 20 न्यूज
मेरठ।स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में शिक्षा, मीडिया और चिकित्सा के क्षेत्र में तीन महत्वपूर्ण आयोजनों का सफल आयोजन एवं समापन हुआ, जिनमें राष्ट्रवाद और मीडिया पर कार्यशाला, चिकित्सा विज्ञान पर शैक्षणिक सम्मेलन तथा आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की घोषणा शामिल है।स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ की नेताजी सुभाष चंद्र बोस शोधपीठ तथा गणेश शंकर विद्यार्थी सुभारती पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का समापन आज संपन्न हुआ। इस दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य विषय राष्ट्रवाद और मीडिया रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में इंडियन हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) के. जी. सुरेश उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मीडिया ऐसा होना चाहिए जो भारत की साख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करे, न कि देश की छवि को धूमिल करे। उन्होंने कहा कि मीडिया देश, उसके संस्थानों और जनता के हित में कार्य करता है, इसलिए उसका उद्देश्य केवल सीमित सरोकारों तक नहीं बल्कि व्यापक राष्ट्रीय हित तक होना चाहिए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व राजनयिक जे. के. त्रिपाठी तथा उत्तराखंड के पूर्व राज्यमंत्री श्री सच्चिदानंद शर्मा पोखरियाल भी उपस्थित रहे। पोखरियाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि वास्तविक मीडिया वही है जो राष्ट्र-निर्माण में सहायक हो, लोगों के हौसले बुलंद करे और प्रत्येक नागरिक में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश-निर्माण में सबसे प्रभावी भूमिका वही मीडिया निभा सकता है जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेजर जनरल प्रोफेसर (डॉ.) गोपाल कृष्ण थपलियाल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला। वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रमोद कुमार शर्मा ने राष्ट्रवाद और मीडिया विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्हें जिम्मेदार, नैतिक एवं राष्ट्रहित आधारित पत्रकारिता अपनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के अंत में गणेश शंकर विद्यार्थी सुभारती पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) रितेश चौधरी ने विद्यार्थियों से सभी पेशेवर मानकों और नैतिक आदर्शों का पालन करते हुए मीडिया को समझने तथा सदैव देशहित को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। कार्यशाला का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय के सुभारती मेडिकल कॉलेज द्वारा प्रो. डॉ. सौरभ सिंघल की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय शैक्षणिक सम्मेलन सूमकॉन 2026 का भी सफल समापन हुआ। इस सम्मेलन ने वरिष्ठ चिकित्सकों, शिक्षाविदों, स्नातकोत्तर छात्रों तथा शोधकर्ताओं को एक साझा मंच प्रदान किया। सम्मेलन का उद्देश्य साक्ष्य-आधारित चिकित्सा, बहुविषयक अकादमिक संवाद तथा व्यावहारिक क्लिनिकल प्रशिक्षण को बढ़ावा देना रहा। यह सम्मेलन आंतरिक चिकित्सा एवं उससे संबद्ध उपविशेषताओं में वर्तमान चुनौतियों और नवीनतम प्रगतियों पर केंद्रित एक सशक्त बौद्धिक मंच के रूप में उभरा। सम्मेलन के वैज्ञानिक कार्यक्रम में प्लेनरी व्याख्यान, पैनल चर्चाएँ, केस-आधारित सिम्पोज़ियम तथा विशेष कार्यशालाएँ सम्मिलित रहीं। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी एवं रिसर्च मेथडोलॉजी जैसे विषयों पर देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं से आए विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। सूमकॉन 2026 की विशेष पहचान हैंड्स- ऑन कार्यशालाएँ रहीं, जिनमें अपर एवं लोअर जीआई एंडोस्कोपी, रीनल बायोप्सी, परमैकेथ इन्सर्शन तथा पीयर रिसर्च केस रिपोर्ट लेखन* शामिल था। सम्मेलन के दौरान ओरल एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से युवा शोधकर्ताओं को अपने मौलिक शोध और केस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अवसर भी मिला। समापन सत्र में आयोजक समिति ने इसे चिकित्सा, शोध और व्यवहारिक ज्ञान को जोड़ने वाली एक सहयोगात्मक अकादमिक पहल बताया।वहीं, सुभारती कॉलेज ऑफ एलाइड एंड हेल्थकेयर, फैकल्टी ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज द्वारा डायग्नोस्टिक मेडिकल टेक्नोलॉजी में हाल के रुझान विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 21 एवं 22 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में किया जाएगा। इस सम्मेलन में मेडिकल डायग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी में हो रही नवीनतम प्रगति पर व्यापक चर्चा होगी। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधि भाग लेंगे, जिनमें मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज, रेडियोलॉजी, ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी और ऑप्टोमेट्री जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ, पेशेवर और विद्वान शामिल होंगे। यह आयोजन अंतर-विषयक सहयोग, ज्ञान-विनिमय और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

