मेरठ संवाददाता एन 20 न्यूज़
मेरठ श्रावण मास में होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और सक्रिय नजर आ रहा है। यात्रा मार्ग पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पैदल यात्रा करते हैं। इस दौरान कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता रहती है। इसी क्रम में सरधना तहसील सभागार में उप जिलाधिकारी (एसडीएम) उदित नारायण सेंगर की अध्यक्षता में एक अहम बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के ढाबा संचालकों को बुलाकर शासन की गाइडलाइन से अवगत कराया गया।एसडीएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान ढाबों पर मांसाहारी भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा, साथ ही प्याज और लहसुन जैसी वस्तुओं की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखते हुए यह निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने ढाबा संचालकों से अपेक्षा की है कि वे इन निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करेंगे।यात्रा मार्ग पर स्थित सभी ढाबों को विशेष रूप से साफ-सुथरा रखने के निर्देश दिए गए हैं। एसडीएम ने कहा कि किसी भी ढाबे पर गंदगी, बासी भोजन या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थ पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भोजन बनाने और परोसने वाले कर्मचारियों की स्वस्थता और स्वच्छता का भी ध्यान रखना होगा। रसोई से बाहरी व्यक्ति को दूर रखा जाए। एसडीएम उदित नारायण सिंगर ने ढाबा संचालकों को आगाह किया कि बिजली की असुरक्षित वायरिंग से कोई हादसा न हो, इसके लिए वे खुले तारों की सही ढंग से टेपिंग करें। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि लोहे के पाइपों पर रबर या प्लास्टिक की कवरिंग अवश्य की जाए, जिससे करंट लगने की आशंका को रोका जा सके। यात्रियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।बैठक में साफ शब्दों में कहा गया कि जो भी ढाबा संचालक शासन की गाइडलाइन का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, ढाबा सील करना, यहां तक कि एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई तक के आदेश दिए जा सकते हैं।इस बैठक में खाद्य सुरक्षा अधिकारी रामप्रताप सिंह एवं जगबीर चौधरी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने खाद्य सुरक्षा से संबंधित तकनीकी दिशा-निर्देशों के बारे में जानकारी दी और ढाबा संचालकों को जागरूक किया।बैठक में बड़ी संख्या में ढाबा संचालकों ने भाग लिया और प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों को गंभीरता से सुना। कुछ संचालकों ने यात्रा के दौरान आने वाली समस्याओं को भी अधिकारियों के समक्ष रखा, जिनका समाधान करने का आश्वासन दिया गया।

