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चप्पे-चप्पे पर फोर्स, आईडी जांच के बिना नहीं मिली किसी को एंट्री
मेरठ संवाददाता एन 20 न्यूज
मेरठ। कपसाड़ गांव में दलित महिला की नृशंस हत्या और उनकी बेटी के अपहरण की घटना के बाद उपजे जबरदस्त तनाव को काबू में रखने के लिए प्रशासन ने रविवार को सुरक्षा के ऐसे सख्त इंतजाम किए कि पूरा गांव एक अभेद्य दुर्ग में तब्दील नजर आया। पांचवें दिन सोमवार को भी हालात सामान्य होने के बावजूद प्रशासन किसी भी तरह की चूक के मूड में नहीं दिखा। गांव की ओर जाने वाले सभी रास्तों पर भारी पुलिस बल की तैनाती रही और हालात ऐसे बने रहे कि “परिंदा भी पर नहीं मार सका”।मुरादनगर-रुड़की कांवड़ मार्ग, सालवा, दौराला और मुजफ्फरनगर सीमा से लगने वाले सभी संपर्क मार्गों पर पुलिस, पीएसी और आरएएफ की संयुक्त टुकड़ियों ने मोर्चा संभाल रखा था। गांव के भीतर हर गली, चौराहा और संवेदनशील बिंदु पर सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात रहे। प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश थे कि किसी भी बाहरी व्यक्ति, सामाजिक संगठन या राजनीतिक दल के नेताओं को गांव की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इसी कारण दिनभर कई नेताओं को बैरिकेडिंग से ही वापस लौटना पड़ा।आईडी कार्ड के बिना नहीं मिली गांव में एंट्रीसुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गांव में प्रवेश के लिए रहने वाले लोगों को भी सघन पूछताछ और वैध पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य किया गया। मुजफ्फरनगर सीमा स्थित सठेड़ी पुल से लेकर सालवा व दौराला मार्ग तक कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई थी। पुलिस हर आने-जाने वाले वाहन और व्यक्ति की गहन जांच करती नजर आई।अनुभवी अधिकारियों को सौंपी गई कमानप्रशासन ने इस बार बेहद संतुलित और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया। उन वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों को ड्यूटी पर बुलाया गया, जो पूर्व में सरधना क्षेत्र में तैनात रह चुके हैं और स्थानीय सामाजिक संरचना व भौगोलिक परिस्थितियों से भली-भांति परिचित हैं। इन अधिकारियों को प्रमुख नाकाबंदी बिंदुओं और संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।उच्चाधिकारी स्वयं गांव में कैंप किए रहे और ड्रोन कैमरों व सीसीटीवी के माध्यम से पूरे इलाके की पल-पल की निगरानी की जाती रही।आरोपी पारस सोम 14 दिन की न्यायिक हिरासत मेंकानूनी मोर्चे पर भी रविवार को अहम प्रगति देखने को मिली। मामले के मुख्य आरोपी पारस सोम को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने अपहरण के बाद बरामद की गई पीड़ित बेटी को भी अदालत में पेश कर उसके बयान दर्ज कराए। यह पूरी प्रक्रिया प्रशासन की उस कार्ययोजना का हिस्सा रही, जिसके तहत मामले में तेजी से कानूनी कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया जा रहा है।प्रशासनिक आश्वासन के बाद हुआ अंतिम संस्कारउल्लेखनीय है कि गुरुवार को हुई इस हृदयविदारक घटना के बाद गांव में भारी आक्रोश फैल गया था। परिजनों और ग्रामीणों ने न्याय, सुरक्षा और सरकारी सहायता की मांग को लेकर विरोध जताया था। प्रशासन द्वारा आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने के लिखित आश्वासन के बाद ही मृतका का अंतिम संस्कार संभव हो सका।शांति बनाए रखना बनी बड़ी चुनौतीहालांकि फिलहाल गांव में हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन पांचवें दिन भी शांति व्यवस्था बनाए रखना पुलिस और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। किसी भी प्रकार की अफवाह या बाहरी हस्तक्षेप को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। अधिकारी साफ तौर पर कह रहे हैं कि स्थिति सामान्य होने तक सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

