मेरठ संवाददाता एन 20 न्यूज
मेरठ। जानी पुलिस ने शुक्रवार को संयुक्त गुर्जर परिसंघ मेरठ के अध्यक्ष भोपाल सिंह गुर्जर को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया। यह कदम उस समय उठाया गया जब गुर्जर समाज सरकार की उस नीति का विरोध कर रहा है जिसमें जाति-आधारित राजनीतिक रैलियों एवं साइनबोर्ड पर रोक लगाई गई है। भोपाल सिंह गुर्जर ने इसे गुर्जर समाज की ऐतिहासिक पहचान मिटाने का सुनियोजित प्रयास करार दिया। उन्होंने कहा कि सम्राट मिहिर भोज की पहचान और ‘गुर्जर’ शब्द की गरिमा पूरे भारत की धरोहर है। मिहिर भोज ने 836 से 885 ईस्वी तक एक विशाल साम्राज्य पर शासन किया और आक्रमणकारियों से भारतभूमि की रक्षा की। उनके नाम से ‘गुर्जर’ शब्द हटाना करोड़ों लोगों की भावनाओं पर प्रहार और इतिहास से छेड़छाड़ है। उन्होंने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। कहा कि जब भारतीय सेना में विभिन्न जातियों के नाम पर इकाइयाँ और देशभर में जातीय नाम से संस्थान, विश्वविद्यालय, पुरस्कार एवं योजनाएँ चल रही हैं, तो सिर्फ गुर्जर समाज को क्यों निशाना बनाया जा रहा है
गुर्जर समाज की प्रमुख मांगे
1. जाति-आधारित रैलियों और साइनबोर्ड पर रोक लगाने वाली नीति को तुरंत वापस लिया जाए।
2. सम्राट मिहिर भोज की ऐतिहासिक पहचान व ‘गुर्जर’ शब्द की गरिमा अक्षुण्ण रखी जाए।
3. किसी भी निर्णय से पूर्व समाज के प्रतिनिधियों से पारदर्शी संवाद स्थापित किया जाए।
4. दादरी में शांतिपूर्ण धरना कर रहे बंद गुर्जर समाज के लोगों को तुरंत रिहा किया जाए।
संविधान का हवाला देते हुए परिसंघ ने अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 29 (सांस्कृतिक अधिकार) का उल्लेख किया और कहा कि यह नीति लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर प्रहार है।भोपाल सिंह गुर्जर ने प्रधानमंत्री से इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि मांगों की अनदेखी की गई, तो गुर्जर समाज अपने इतिहास और सम्मान की रक्षा के लिए देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन करने को बाध्य होगा।

