मेरठ संवाददाता एन 20 न्यूज
बागपत। बड़ौत में बने संविधान पार्क में लगी प्रस्तावना की प्रतिलिपि से “समाजवादी” और “पंथनिरपेक्ष” शब्द हटाए जाने के आरोप को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने इसे संविधान के साथ छेड़छाड़ बताते हुए प्रशासन से तुरंत दोनों शब्द जोड़ने की मांग की है।कांग्रेस नेताओं के साथ शाहनवाज़ आलम ने डीएम की अनुपस्थिति में एडीएम शिवनारायण सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रस्तावना से इन शब्दों को हटाना राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की धारा 2 के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है, जिसमें तीन साल तक की सजा या जुर्माने का प्रावधान है।शाहनवाज़ आलम ने कहा कि डीएम अस्मिता लाल का यह बयान कि पार्क में लगी प्रस्तावना संविधान की मूल प्रति पर आधारित है, भ्रामक है। उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में तीन तर्क दिए—केशवानंद भारती मामले (1973) में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के मूल ढांचे के सिद्धांत को स्थापित किया था, जिसके तहत प्रस्तावना के मूल तत्वों में बदलाव नहीं किया जा सकता।1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिए प्रस्तावना में “समाजवादी” और “पंथनिरपेक्ष” शब्द जोड़े गए थे।नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इन शब्दों को हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी।कांग्रेस नेता हेमंत प्रधान ने कहा कि यह मामला गंभीर है और इलाहाबाद हाईकोर्ट को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो कोर्ट में डीएम, मंत्री और नगरपालिका चेयरमैन के खिलाफ याचिका दायर की जाएगी।इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष लव कश्यप, शहर अध्यक्ष राम हरि पवार, पूर्व मंत्री ओमवीर तोमर, इमरान इदरीसी, सरफराज़ मलिक, वसीम अहमद और अजेंद्र बली सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

