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अनीस अहमद संवाददाता एन 20 न्यूज
मेरठ। मेरठ के जानी क्षेत्र में मिलावटी पनीर और क्रीम बनाने का बड़ा खेल सामने आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई गांवों में लंबे समय से यह अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। आरोप है कि इस पूरे मामले में खाद्य विभाग के एक फूड इंस्पेक्टर की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जिसकी कथित छत्रछाया में यह कारोबार फल-फूल रहा है।ग्रामीणों के अनुसार जानी क्षेत्र के सिसौला बुजुर्ग, नगला कुंभ, चन्दौरा और पूंठरी गांवों में बड़े पैमाने पर मिलावटी पनीर और क्रीम तैयार की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह मिलावटी उत्पाद आसपास के बाजारों और दुकानों में सप्लाई किए जाते हैं, जिससे लोगों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खाद्य विभाग के एक फूड इंस्पेक्टर के संरक्षण में यह अवैध धंधा चल रहा है। आरोप है कि कार्रवाई से बचाने के नाम पर कारोबारियों से हर महीने तय रकम ली जाती है। इसके लिए सिवालखास क्षेत्र के एक व्यक्ति को कथित तौर पर जिम्मेदारी दी गई है, जो फूड इंस्पेक्टर के नाम पर इलाके में घूमकर मिलावटी पनीर और क्रीम बनाने वालों से “हफ्ता” वसूलता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यक्ति नियमित रूप से गांवों में जाकर पैसा इकट्ठा करता है, जिसके बाद मिलावटखोरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।स्थानीय लोगों का कहना है कि मिलावटी पनीर और क्रीम के सेवन से लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह उत्पाद बेहद हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने फूड इंस्पेक्टर और कथित तौर पर हफ्ता वसूली करने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग उठाई है, ताकि मिलावटखोरी के इस गोरखधंधे पर लगाम लगाई जा सके और आम लोगों की सेहत से हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके।

